ऐलर्जी वाला जुकाम (Allergic Rhinitis)
आज के समय में बढ़ते प्रदूषण, धुएँ, रासायनिक पदार्थों, पेड़-पौधों के पराग कण और जानवरों के बालों के कारण एलर्जी से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। एलर्जी मुख्य रूप से नाक, फेफड़ों, आंखों और त्वचा को प्रभावित करती है। जब किसी व्यक्ति की नाक में ऐसे कण पहुंचते हैं जिनसे उसे एलर्जी होती है, तो उसे बार-बार छींक आना, नाक बहना, नाक में खुजली और बंद नाक जैसी समस्याएँ होने लगती हैं। इस स्थिति को ऐलर्जिक राइनाइटिस (Allergic Rhinitis) कहा जाता है।
कुछ लोगों में यह समस्या दमे (Asthma) के साथ भी जुड़ी होती है। ऐसे मरीजों को सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न और लगातार खांसी की शिकायत हो सकती है। मौसम बदलने के समय यह परेशानी अधिक बढ़ जाती है।
ऐलर्जिक राइनाइटिस के मुख्य लक्षण
- लगातार छींक आना
- नाक से पानी बहना
- नाक में खुजली होना
- नाक बंद रहना
- आंखों में जलन या पानी आना
- सांस फूलना या खांसी होना
- मौसम बदलते ही परेशानी बढ़ना
लंबे समय तक एलर्जी रहने पर नाक के अंदर मांस बढ़ सकता है और नाक में पॉलिप बनने का खतरा भी रहता है।
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बीमारी क्यों होती है?
एलर्जी पैदा करने वाले छोटे-छोटे कण सांस के साथ नाक में प्रवेश करते रहते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- धूल और मिट्टी
- धुआँ
- पराग कण (Pollen)
- जानवरों के बाल
- हाउस डस्ट माइट
- तेज खुशबू वाले पदार्थ
जब शरीर इन कणों के प्रति संवेदनशील हो जाता है, तब एलर्जी की प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है।
उपचार और बचाव
ऐलर्जिक राइनाइटिस को पूरी तरह खत्म करने वाली कोई स्थायी दवा अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन सही इलाज और सावधानी से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
इलाज में उपयोगी उपाय
- दिन में कई बार साफ पानी से नाक धोना
- डॉक्टर की सलाह से एलर्जी की दवाएँ लेना
- जरूरत पड़ने पर नेजल स्प्रे का प्रयोग करना
- एलर्जी बढ़ाने वाली चीजों से दूरी बनाना
नाक में डालने वाले ड्रॉप्स का अधिक उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनके लगातार प्रयोग से आदत पड़ सकती है।
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एलर्जी रोकने वाली दवाएँ
1. गोलियाँ
इनका सेवन रोज करना पड़ सकता है। कुछ लोगों में इनसे हल्की नींद या सुस्ती महसूस हो सकती है।
2. नेजल स्प्रे
इनका उपयोग नाक में स्प्रे के रूप में किया जाता है। सही तरीके से उपयोग करने पर सामान्यतः इनके गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होते।
एलर्जी के मरीजों के लिए जरूरी परहेज
खाने-पीने में सावधानी
एलर्जी वाले मरीजों को निम्न चीजों से बचना चाहिए:
- ठंडा पानी
- आइसक्रीम
- कोल्ड ड्रिंक्स
- ठंडा दही
- बहुत खट्टे और ठंडे फल
यदि किसी विशेष खाद्य पदार्थ से परेशानी महसूस हो, तो उसका सेवन बंद कर देना चाहिए।
पान मसाला, सुपारी, पान और तंबाकू एलर्जी और सांस की बीमारी को काफी बढ़ा सकते हैं, इसलिए इनसे पूरी तरह बचना चाहिए।
धूल और धुएँ से बचाव
सभी प्रकार के धुएँ एलर्जी को बढ़ा सकते हैं, जैसे:
- सिगरेट और बीड़ी का धुआँ
- अगरबत्ती और धूपबत्ती
- रसोई का धुआँ
- वाहनों और जनरेटर का धुआँ
इसके अलावा तेज खुशबू वाले परफ्यूम, डियोड्रेंट, रूम फ्रेशनर और पेंट आदि भी एलर्जी बढ़ा सकते हैं।
घर में झाड़ू लगाने की बजाय पोछा लगाने और वैक्यूम क्लीनर का उपयोग करने से धूल कम फैलती है।
हाउस डस्ट माइट से सावधान
बिस्तर और गद्दों में पाए जाने वाले बेहद छोटे कीट, जिन्हें हाउस डस्ट माइट कहा जाता है, एलर्जी का बड़ा कारण बन सकते हैं।
बचाव के उपाय
- रोज साफ चादर का उपयोग करें
- बिस्तर को धूप में सुखाएँ
- तकिए और गद्दों की नियमित सफाई करें
दवाओं के प्रयोग में सावधानी
कुछ दवाएँ एलर्जी और दमे की समस्या बढ़ा सकती हैं, जैसे:
- एस्प्रिन
- कुछ दर्द निवारक दवाएँ
- बीटा ब्लॉकर दवाएँ
इसलिए किसी भी दवा का उपयोग डॉक्टर की सलाह से ही करें।
स्टीरॉइड दवाओं से सावधान
कुछ लोग तुरंत राहत पाने के लिए स्टीरॉइड दवाओं का उपयोग करते हैं। ये दवाएँ शुरुआत में तेजी से आराम देती हैं, लेकिन लंबे समय तक उपयोग करने पर गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए इनका उपयोग केवल योग्य डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।
वायरल जुकाम और एलर्जी में अंतर
सामान्य वायरल जुकाम और एलर्जी वाला जुकाम अलग होते हैं। एलर्जी वाले लोगों को वायरल इन्फेक्शन जल्दी हो सकता है और ठीक होने में अधिक समय लग सकता है। एलर्जी की दवाएँ वायरल जुकाम को रोक नहीं सकतीं।
निष्कर्ष
ऐलर्जिक राइनाइटिस एक आम लेकिन लंबे समय तक परेशान करने वाली समस्या है। सही इलाज, साफ-सफाई, धूल और धुएँ से बचाव तथा डॉक्टर की सलाह से दवाओं का नियमित उपयोग करके इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।


